ओ साला बॉस बोले काम करो ...
पर ये दिल बोले आराम करो ...
इस प्रोजेक्ट ने डंडा कर दिया
दिमाग का दही ...
अंगो को ठंडा कर दिया
वीकएंड में बुलाने का लफड़ा कर दिया
बार बार डंडा कर झगड़ा कर लिया
अरे यारों खाली-पीली बात छोड़ो ...
चाय का टाइम हुआ ... चल्लेओ क्या ...
बड़ी मुश्किल में एक लड़की पटाई
वीकएंड में मिलने की प्लानिंग बनाई
सारी सेटिंग थी अचानक ....
PM की कॉल आई
ना मिल सका उससे ...
लड़की भी गवांई ...
अरे यारों खाली-पीली बात छोड़ो ...
जूस का टाइम हुआ ... चल्लेओ क्या ...
ऑफिस में लोग मस्ती में रहते हैं
यही हम आकर नाईट में घिसते हैं
गाली दे दे कर हमने क्लाइंट की लगाई
फिर भी साले उसने काम भर भर के सुलगाई
अरे यारों अब खाली-पीली बात छोड़ो
सुट्टे का टाइम हुआ ... चल्लेओ क्या ...
(Video is comming soon...)
creative-bakwas
Monday, October 20, 2008
Thursday, July 24, 2008
न करूँ स्विच ?
दोस्तों गघ़ में कुछ बक्चोदी बकचोद स्टार ( Prateesh Pandey - a software engineer) की ओर से
न करूँ स्विच ?
क्यूं न करूँ स्विच ?
अन्धेयारी निशा का साया
सप्ताहन्त सन्ध्या पर
काम का चरम दबाब
वातानुकूल लैब में बैठ
मेरा निशाचरी दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?
आउट डेटड बॉस के
घिसे पिटे वादों से क्षुब्ध
अदिकालीन ख्यालो से आहात
अपने ही दोस्तों से प्रतिस्पर्धा करता
मेरा सहज दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?
काम के तलाश
जिम्मेदारी के आस
सम्मान के कसक में
टीम दर टीम - प्रोजेक्ट दर प्रोजेक्ट
मेरा भटकता दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?
नक्कारे माहौल में
मक्कारों के बीच
विलुप्त होते प्रोजेक्ट का साया
घटते कर्मियों के तादात से
मेरा असुरक्षित दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?
R&D के लिए हायर्ड
डवलपमेंट से बोझिल
टेस्टिंग में अटका
छुटिटयों की चिरकाल से प्रतीक्षित
मेरा कुंठित दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?
बहुराष्ट्रीय आय से सिंचित
वित्त सरिता सी कंपनी
८% इन्क्रेमेन्ट के चने चबाता
आन साईट के सपने सपनो में देखता
मूल्यांकन - समीक्षा में लताड़ित
मेरे प्रताडित दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?
Labels:
company change,
frustation,
job switch,
software
Tuesday, July 22, 2008
चाय माता
Bakchode is not limited to prose and words only , it has many wings.One of my good friend “Bakchod star” (Sourabh Jain) express it in contemporary poetry, which I share with you all.चाय, चाय चाय...तुझे छोड़ने के कितने किए उपाये
तेरे लिए घर छोड़ा ,मगर तुझे न छोड़ पाये॥
हे कलयुग की देवी , तेरे कितने यजमान हैं
हर गली ,हर नुक्कड़ पर तेरी प्रतिमा विराजमान हैं ॥
हर घर में, रोज सुबह तेरी ही पूजा की जाती है
हर घर में अगरबत्ती से पहले तेरी ही खुशबु आती है ॥
हे देवी कटिंग, स्पेशल, ,मसाला, तेरे कई नाम हैं
हे चाय देवी तुझे शत शत प्रणाम हैं ॥
हे देवी, क्या सर्दी क्या गर्मी हर मौसम की तू रानी है
बस सर्दी मैं अदरक ज्यादा और कम पानी हैं ॥
चाय माता तुझसे बढकर नही है कोई दूजा
हम भक्तो की यही प्रार्थना, घर घर में चाय माता की हो पूजा ॥
सबको नींद से जगाने वाली
सर दर्द भागने वाली
भक्तो के कष्ट मिटने वाली.
चाय माता तेरी सदा विजय हो ॥
बोलो चाय माता की जय…
बोलो चाय माता की जय…
Thursday, June 5, 2008
Frustration burster
Creative Bakwas is altogether a new scientific way to be relax and stay away from frustration . To live long and happy I cordially welcome to all of you in our new community and thought process.
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