Thursday, July 24, 2008

न करूँ स्विच ?




दोस्तों गघ़ में कुछ बक्चोदी बकचोद स्टार ( Prateesh Pandey - a software engineer) की ओर से



न करूँ स्विच ?
क्यूं न करूँ स्विच ?
अन्धेयारी निशा का साया

सप्ताहन्त सन्ध्या पर
काम का चरम दबाब
वातानुकूल लैब में बैठ
मेरा निशाचरी दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?

आउट डेटड बॉस के
घिसे पिटे वादों से क्षुब्ध
अदिकालीन ख्यालो से आहात
अपने ही दोस्तों से प्रतिस्पर्धा करता
मेरा सहज दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?

काम के तलाश
जिम्मेदारी के आस
सम्मान के कसक में
टीम दर टीम - प्रोजेक्ट दर प्रोजेक्ट
मेरा भटकता दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?

नक्कारे माहौल में
मक्कारों के बीच
विलुप्त होते प्रोजेक्ट का साया
घटते कर्मियों के तादात से
मेरा असुरक्षित दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?

R&D के लिए हायर्ड
डवलपमेंट से बोझिल
टेस्टिंग में अटका
छुटिटयों की चिरकाल से प्रतीक्षित
मेरा कुंठित दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?

बहुराष्ट्रीय आय से सिंचित
वित्त सरिता सी कंपनी
८% इन्क्रेमेन्ट के चने चबाता
आन साईट के सपने सपनो में देखता
मूल्यांकन - समीक्षा में लताड़ित
मेरे प्रताडित दिल सोचता है
क्यूं न करूँ स्विच ?

Tuesday, July 22, 2008

चाय माता

Bakchode is not limited to prose and words only , it has many wings.One of my good friend “Bakchod star” (Sourabh Jain) express it in contemporary poetry, which I share with you all.

चाय, चाय चाय...तुझे छोड़ने के कितने किए उपाये
तेरे लिए घर छोड़ा ,मगर तुझे न छोड़ पाये॥


हे कलयुग की देवी , तेरे कितने यजमान हैं
हर गली ,हर नुक्कड़ पर तेरी प्रतिमा विराजमान हैं ॥

हर घर में, रोज सुबह तेरी ही पूजा की जाती है
हर घर में अगरबत्ती से पहले तेरी ही खुशबु आती है ॥


हे देवी कटिंग, स्पेशल, ,मसाला, तेरे कई नाम हैं
हे चाय देवी तुझे शत शत प्रणाम हैं ॥


हे देवी, क्या सर्दी क्या गर्मी हर मौसम की तू रानी है
बस सर्दी मैं अदरक ज्यादा और कम पानी हैं ॥


चाय माता तुझसे बढकर नही है कोई दूजा
हम भक्तो की यही प्रार्थना, घर घर में चाय माता की हो पूजा ॥


सबको नींद से जगाने वाली
सर दर्द भागने वाली
भक्तो के कष्ट मिटने वाली.
चाय माता तेरी सदा विजय हो ॥


बोलो चाय माता की जय…
बोलो चाय माता की जय…